अयोध्या केस में अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ योगी आदित्यनाथ सख्त, जारी किए ये निर्देश

कई सालों से चले आ रहे अयोध्या के राम मंदिर और बाबरी मस्जिद केस में जल्द ही कुछ बड़ा फैसला आ सकता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने यूपी के लिए कुछ निर्देश जारी कर दिए हैं। योगी सरकार ने केस की गंभीरता को देखते हुए योगी सरकार ने पुलिस को सोशल मीडिया पर होने वाली हरकतों पर ध्यान रखने को कहा है। इसके साथ ही योगी आदित्यनाथ ने हर जिले में विशेष कंट्रोल रुम खोलने का भी आदेश दे दिया है। जो 24 घंटे काम करेगा।

  • ये हैं योगी आदित्यनाथ के अध्योध्या मामले में राज्य की सुरक्षा को लेकर दिए गए 10 निर्देश
  • सभी धार्मिक स्थालों की सुरक्षा को और बढ़ा दिया जाए
  • सभी महत्वपूर्ण धर्मगुरुओं को विश्वास में लिया जाए और उनसे अपील की जाए कि वे अपने समाज के लोगों को सद्भाव बनाये रखने को कहें
  • जिला स्तर पर मीडिया से बातचीत कर उनसे कहा जाए कि इससे जुड़ी खबर को सनसनी बनाने से परहेज़ करें
  • हर उस व्यक्ति से बात की जाए जिसकी समाज में हैसियत है. इनमें धर्म गुरु,वकील,छात्र नेता,व्यापारी और दूसरे लोग हो सकते हैं
  • फैसला आने के बाद राज्य में न कोई जश्न मनाए और न ही कोई विरोध करे
  • सोशल मीडिया की गहरी निगरानी की जाए ताकि कोई अफवाह और नफरत न फैला सके
  • पुलिस और प्रशासन के सारे सीनियर अफसर खुद मैदान में मौजूद रहें
  • पुलिस हर जगह फुट पेट्रोलिंग करती नजर आए
  • फुटपाथ पर रहने वाले बेघरों को रेन बसेरों में शिफ्ट किया जाए और उनकी सुरक्षा की जाए
  • सोशल मीडिया पर ऐसा करने वालों के खिलाफ फौरन एक्शन लिया जाए

राज्य में सामाजिक सौहार्द बरकरार रखने के लिए डीजीपी ने कहा, “12 हजार से अधिक उपद्रवियों पर नजर रखी जा रही है और अब तक इस संबंध में 450 से अधिक लोगों को जेल भेजा जा चुका है। सूबे में पूरी तरह से शांति बहाल रहे, इसके लिए हमने सबसे ज्यादा ध्यान सोशल मीडिया से फैलने वाली अफवाहों पर दिया है। शांति और सुरक्षा को लेकर हमने करीब 5800 शांतिवार्ताएं और सैकड़ों की संख्या में धर्मगुरुओं से मुलाकात की।”

माना जा रहा है, 17 नवंबर से पहले फैसला कभी भी सुनाया जा सकता है। गौरतलब है कि 17 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसलिए उनके सेवानिवृत्त से पहले फैसला आने की पूरी संभावना जताई जा रही है। पिछले माह 16 अक्टूबर को ही अयोध्या मामले पर रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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