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 महाशिवरात्रि : इस मंदिर में नाग-नागिन आते हैं भगवान शिव की पूजा करने

आज पूरे देश में महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। महाशिवरात्रि को लेकर तडक़े ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। भक्त बेल पत्र, दूध समेत अन्य सामग्री शिवलिंग पर चढ़ा रहे हैं। वहीं छत्तीस$गढ़ के रायपुर में एक ऐसा मंदिर है जहां नाग-नागिन भगवान शिव की पूजा करने आते हैं। माना जाता है की इस मंदिर दर्शन मात्र से ही मन्नतें पूरी हो जाती है। इस मंदिर में करीब 250 साल पुराना प्राचीन पंचमुखी शिवलिंग है। ऐसी मान्यता है कि यहां नि:संतान मन्नत मांगते हैं तो उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है और उनकी सुनी गोद में किलकारियां खिल उठती हैं।

यहां के ग्रामीणों का कहना है कि यहां सालों से नाग-नागिन का जोड़ा आते देख रहे हैं। वे मंदिर के गर्भगृह में भोले का दर्शन कर उनकी प्रतिमा से लिपटकर वापस चले जाते हैं। मंदिर दो तालाबों के बीच में स्थित है, जो इसकी छवि को और भी मनोरम व प्राकृतिक बना देता है। तालाब में सालों पुराने कछुए है। जिसकी आयु का पता नहीं है। यहां आने वाले श्रद्धालु कछुआ और मछली को आटा खिलाते हैं।

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मंदिर की स्थापना सरोना के जमींदार स्व. गुलाब सिंह ठाकुर के द्वारा संतान प्राप्ति के लिए ही किया था। ठाकुर परिवार के वंशजों का कहना है कि उनके पूर्वज निसंतान थे। कई जगह दुवाएं मांगी पर उन्हें पुत्र नहीं मिला, लेकिन मंदिर स्थापना के कुछ साल बाद ही उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। तभी से इस पंचमुखी शिव का जागृत स्वरूप विख्यात हो गया। हरियाणा के कुरुक्षेत्र के पिहोवा के गांव अरुणाय में भगवान शंकर का संगमेश्वर मंदिर है। यह मंदिर चमत्कार एवं लोक कथाओं के लिए बहुत प्रसिद्ध है। बताया जाता है कि ऋषि विश्वामित्र के शाप से मुक्ति पाने के लिए देवी-देवताओं ने यहां शिव आराधना की थी।

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